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CSIR - NATIONAL ENVIRONMENTAL ENGINEERING RESEARCH INSTITUTE

सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक घटक प्रयोगशाला

(विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संगठन)

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पर्यावरण प्रभाव आकलन
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सीएसआईआर-नीरी परिसर
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सीएसआईआर-नीरी परिसर
एलबीएसएनएए, मसूरी के एएस ऑफिसर ट्रेनी (2025 बैच) ने 7 जनवरी 2026 को सीएसआईआर-एनईआरआई का दौरा किया।
एलबीएसएनएए, मसूरी के एएस ऑफिसर ट्रेनी (2025 बैच) ने 7 जनवरी 2026 को सीएसआईआर-एनईआरआई का दौरा किया। Image
एलबीएसएनएए, मसूरी के एएस ऑफिसर ट्रेनी (2025 बैच) ने 7 जनवरी 2026 को सीएसआईआर-एनईआरआई का दौरा किया।
वीएसपीएमएस माधुरीबाई देशमुख संस्थान की 42 नर्सिंग छात्राओं ने सीएसआईआर-एनईआरआई का दौरा किया
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वीएसपीएमएस माधुरीबाई देशमुख संस्थान की 42 नर्सिंग छात्राओं ने सीएसआईआर-एनईआरआई का दौरा किया
Hon'ble Chairman & Members of the Department-related Parliamentary Standing Committee on S&T, Environment, Forest and Climate Change Visited CSIR-NEERI on 27-29 December 2025
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Hon'ble Chairman & Members of the Department-related Parliamentary Standing Committee on S&T, Environment, Forest and Climate Change Visited CSIR-NEERI on 27-29 December 2025
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माननीय राष्ट्रपति ने सीएसआईआर-एनईआरआई के निदेशक डॉ. मोहन को विज्ञान श्री 2025 पुरस्कार से सम्मानित किया।
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माननीय राष्ट्रपति ने सीएसआईआर-एनईआरआई के निदेशक डॉ. मोहन को विज्ञान श्री 2025 पुरस्कार से सम्मानित किया।
सीएसआईआर अधिकारियों द्वारा कोराडी एवं खापरखेड़ा परियोजनाओं में पर्यावरणीय पुनर्स्थापन प्रगति की समीक्षा
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सीएसआईआर अधिकारियों द्वारा कोराडी एवं खापरखेड़ा परियोजनाओं में पर्यावरणीय पुनर्स्थापन प्रगति की समीक्षा
Oil India Limited and Numaligarh Refinery Leadership Visit CSIR-NEERI to Explore Strategic Research–Industry Collaboration for Sustainable Development
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Oil India Limited and Numaligarh Refinery Leadership Visit CSIR-NEERI to Explore Strategic Research–Industry Collaboration for Sustainable Development
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जल स्रोत

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Staff

परिचय (दृष्टि एवं उद्देश्य)

लगातार बढ़ती आबादी और ताज़े पानी के सीमित संसाधन होने के कारण पेयजल उपलब्ध कराना आज की दुनिया में एक बड़ी चुनौती बन गई है। भारत को पेय जल तक की पहुँच और पेय जल की सुरक्षा सुनिश्चित करने से संबंधित बहुआयामी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। भारत के कई राज्यों को अपने नागरिकों को सुरक्षित जल आपूर्ति के संबंध में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। भारत की आबादी के लगभग 54% लोग जल को लेकर उच्च से बहुत उच्च तनाव का सामना करते हैं। उपलब्ध सतही जलाशय जैसे कि झीलें/ तालाब/ नदियाँ भी संदूषित हैं और बैक्टीरिया की दृष्टि से पीने के लिए असुरक्षित है। कुछ स्थानों के भूजल भूजनित संदूषकों जैसे कि फ्लोराइड, आर्सेनिक, लोहा, यूरेनियम, नाइट्रेट आदि से संदूषित हैं, जो इसे पीने के लिए अयोग्य बनाता है। शहरों में, बढ़ती आबादी और परिधि के साथ, मलजल उत्पन्न होता है जो मौजूदा अवसंरचनाओं द्वारा पूरी तरह से प्रबंधित नहीं होता है और जलाशयों में छोड़ दिया जाता है। 2015 के दौरान, देश में अनुमानित मलजल उत्पादन 22963 एमएलडी की विकसित मलजल उपचार क्षमता (केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, 2015) के प्रति 61754 एमएलडी था। इन सभी कारकों से दिन-प्रतिदिन पानी की मात्रा घटती जा रही है और गुणवत्ता असुरक्षित होती जा रही है और कई एजेंसियों ने इसे यथा संभव मौलिक रखने की चुनौती स्वीकार की है। अधिक और सुरक्षित पानी की मांग में वृद्धि के बावजूद, हम में से कई लोगों द्वारा इस बहुमूल्य सम्पदा को आम लोगों के लिए सुलभ बनाने के लिए विवेकपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। भारत में मुख्य रूप से आबादी में वृद्धि और उद्दाम शोषण के कारण प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता में धीरे-धीरे आती गिरावट ने हमें पानी बचाने के लिए विवेकपूर्ण प्रथाओं को सिखाया और उन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है; कई पारंपरिक और उभरते रासायनिक संदूषकों के आगमन और रोगजनक सूक्ष्मजीवों के बहुतायत ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पानी को पीने योग्य बनाने के लिए आविष्कार और उपचार को प्रोत्साहित किया है।

जल प्रौद्योगिकी और प्रबंधन प्रभाग (डब्ल्यूटीएमडी) की स्थापना पानी से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने और जल गुणवत्ता अनुवीक्षण और निगरानी, जल उपचार, जल रक्षा योजना, जल सुरक्षा योजना, संदूषक पारगमन अध्ययन, जलीय-भूगर्भीय अन्वेषण और जल लेखापरीक्षण से संबंधित विकास एवं अनुसंधान गतिविधियाँ निष्पादित करने के उद्देश्य और दृष्टि के साथ की गई थी। डब्ल्यूटीएमडी का निरंतर दक्षता और किफायती कीमत पर बड़े और छोटे समुदायों को पीने योग्य पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सतही और भूजल उपचार के क्षेत्र में विभिन्न प्रौद्योगिकी/ प्रक्रियाओं के विकास का एक इतिहास है। 60 और 70 के दशक में विकसित नालगोंडा फ्लोराइड निष्कासन तकनीक एक महत्वपूर्ण योगदान था। इसे एक कुशल और लागत प्रभावी तकनीक के रूप में पहचाना गया था, जो अभी भी केन्या, इथियोपिया और तंजानिया जैसे देशों में प्रचलन में है। डब्ल्यूटीएमडी में किए जा रहे कार्यों को भारत सरकार के बड़े अभियानों जैसे कि स्वस्थ भारत, स्वच्छ भारत, मेक इन इंडिया, इनोवेट इन इंडिया और नमामि गंगे के साथ निकटता से संरेखित किया गया है। डब्ल्यूटीएमडी में 11 वैज्ञानिक / तकनीकी और लगभग 20 शोधकर्ताएं/ परियोजना कार्मिक हैं और लगभग 20 बड़ी परियोजनाएं हैं जिनका कुल संविदात्मक मूल्य 125 मिलियन भारतीय रुपए हैं।

डब्ल्यूटीएमडी भारत में जल एवं स्वच्छता के लिए डब्ल्यूएचओ के साथ सहयोग करने वाला एकमात्र केंद्र है।

प्रमुख अनुसंधान क्षेत्र

  • जल गुणवत्ता अनुवीक्षण और निगरानी
  • जल उपचार
  • भूजल गुणवत्ता आंकलन और प्रबंधन
  • जलीय-भूगर्भीय एवं भूभौतिकीय अध्ययन
  • ऑनसाइट जल गुणवत्ता अनुवीक्षण किट का विकास
  • मात्रात्मक रासायनिक जोखिम आंकलन (क्यूसीआरए)
  • मात्रात्मक सूक्ष्मजैविक जोखिम आंकलन (क्यूएमआरए)
  • पेय जल की आपूर्ति के लिए स्थानीकृत जल उपचार प्रौद्योगिकियों का विकास
  • जल रक्षा एवं सुरक्षा योजना
  • स्वच्छता सुरक्षा योजना

प्रौद्योगिकी विकास एवं कार्यान्वयन

डब्ल्यूटीएमडी ने ऐतिहासिक रूप से कई प्रौद्योगिकियों का विकास किया है जैसे कि फ्लोराइड निष्कासन के लिए नालगोंडा तकनीक, पॉट क्लोरीनेटर आदि। निम्नलिखित प्रौद्योगिकियां अभी भी प्रचलित हैं:

  • त्वरित वहनीय जल निस्यंदक: नीरी-ज़ार
  • विद्युत फ्लोराइड निष्कासन
  • लौह निष्कासन
  • आर्सेनिक क्षेत्र परीक्षण किट
  • जल गुणवत्ता परीक्षण किट
  • किमो फ्लोराइड निष्कासन
  • किमो आर्सेनिक निष्कासन


नीरी-ज़ार पोर्टेबल इंस्टेंट वॉटर फ़िल्टरसोलर एनर्जी आधारित इलेक्ट्रोलाइटिक डिफ्लोराइडेशन प्लांट्स चित्र 1
नीरी-ज़ार पोर्टेबल इंस्टेंट वॉटर फ़िल्टरसोलर एनर्जी आधारित इलेक्ट्रोलाइटिक डिफ्लोराइडेशन प्लांट्स चित्र 2

सौर ऊर्जा आधारित नीरझर वहनीय त्वरित जल निस्यंदक विद्युत फ्लोराइड निष्कासन संयंत्र

उपकरणों

  • जीपीएस (गार्मिन
  • सुपर स्टिंग मल्टी इलेक्ट्रोड रेजिस्टिविटी मीटर
  • रेजिस्टिविटी मीटर (एसएसआर-एमपीएल)
  • जियो-फिजिकल सर्वे इंस्ट्रूमेंट (जीपीआर) –एसआईआर-3000
  • जीपीआर एंटीना (40 मेगाहर्ट्ज, 200 मेगाहर्ट्ज)
  • टेराटीईएम


बहुपक्षीय और द्विपक्षीय सहयोगी चित्र 1
बहुपक्षीय और द्विपक्षीय सहयोगी चित्र 2

परियोजनाएं (बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय सहयोगात्मक परियोजनाएं)

  • भारत के शहरी क्षेत्रों में पानी की कमी से निपटने के लिए प्राकृतिक जल प्रणाली और उपचार प्रौद्योगिकी (नावाटेक)


ऑर्डेंस फैक्ट्री में कमीशन उपचार संयंत्र चित्र 1
ऑर्डेंस फैक्ट्री में कमीशन उपचार संयंत्र चित्र 2
ऑर्डेंस फैक्ट्री में कमीशन उपचार संयंत्र चित्र 3

आयुध निर्माणी अम्बाझारी, नागपुर में शुरू की गई उपचार संयंत्र

  • स्वस्थ पुन: उपयोग हेतु शहरी मलजल धारा का स्थानीय उपचार (लोटस) – जैव प्रौद्योगिकी विभाग
  • मृदा जैव-उपचार की अनुवीक्षा के लिए भूभौतिकीय पद्धतियाँ – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (भारत-इटालियन)

परियोजनाएं (भारत सरकार की मंत्रालयों/ विभागों द्वारा समर्थित)

  • गंगा नदी के विशेष गुणों को समझने के लिए जल गुणवत्ता आंकलन एवं तलछट विश्लेषण - एनएमसीजी, एमओडब्ल्यूआर, नदी देवी गंगा कायाकल्प, नई दिल्ली


भारत सरकार के मंत्रालय / विभाग चित्र 1
भारत सरकार के मंत्रालय / विभाग चित्र 2
भारत सरकार के मंत्रालय / विभाग चित्र 3

  • भूजल गुणवत्ता और मात्रा पर मैजिक पिट्स के प्रभाव - पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय (एमडीडब्ल्यूएस)
  • एनसीजेडब्ल्यू खान, अमरेली जिला, गुजरात में समुद्री जल अतिक्रमण के निर्धारण के लिए जलीय-भूवैज्ञानिक अध्ययन - सीएसआईआर-केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सीआईएमएफआर)
  • • परिवेश्टक तटस्थ स्थिति में भूजल से फ्लोराइड के अधिशोषक निष्कासन के लिए मिश्रित धातु (हाइड्रो) ऑक्साइड सामग्री का विकास - विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
  • आंतरायिक और निरंतर जल आपूर्ति प्रणालियों में संदूषण क्षेत्रों के पूर्व निर्धारण के लिए संभाव्य उपागम और स्वास्थ्य प्रभाव - विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
  • जल परीक्षण प्रयोगशालाओं के रसायन विज्ञानियों और तकनीकी कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम - पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय (एमडीडब्ल्यूएस)
  • जल और वायु गुणवत्ता अनुवीक्षण, प्रतिचयन, विश्लेषण और डेटा प्रबंधन: हैंड्स-ऑन-ट्रेनिंग-केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) दिल्ली
  • "पर्यावरणीय प्रबंधन, जैव विविधता और पर्यावरणीय अनुवीक्षण (वायु और जल गुणवत्ता)" पर सर्टिफिकेट कोर्स - टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (टीएचडीसीआईएल)

परियोजनाएं (राज्य सरकार की संगठनों द्वारा समर्थित)

  • जल गुणवत्ता परीक्षण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम सहित पेय जल के नमूनों में भारी धातुओं / विषाक्त धातुओं / कीटनाशकों / उर्वरकों का परीक्षण - जल आपूर्ति एवं स्वच्छता संगठन (डब्ल्यूएसएसओ)

जल धातु परीक्षण / जल आपूर्ति और स्वच्छता संगठन चित्र 1 जल धातु परीक्षण / जल आपूर्ति और स्वच्छता संगठन चित्र 2 जल धातु परीक्षण / जल आपूर्ति और स्वच्छता संगठन चित्र 3

  • उपचार संयंत्र का मूल्यांकन, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडब्ल्यूएसडी), झारखंड सरकार
  • ओडिशा राज्य में पेयजल आपूर्ति के लिए विभिन्न एजेंसियों द्वारा लगाए गए फ्लोराइड निष्कासन पायलट संयंत्र वाले तीन हैण्ड पंप का मूल्यांकन - ग्रामीण जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग (आरडब्ल्यूएस एंड एस)
  • भूजल में आर्सेनिक संदूषण का मूल्यांकन – लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी), छत्तीसगढ़
  • पेय जल की गुणवत्ता का आंकलन और उपचार के विकल्पों का निरूपण
  • सतपुड़ा थर्मल पावर स्टेशन की 111 हेक्टेयर भूमि (चरण- II) पर और उसके आस-पास के क्षेत्र में भूजल, सतही जल और मिट्टी की गुणवत्ता पर प्रभाव आंकलन - एमपी पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड
  • जल उपचार संयंत्र सूरजपुरा, जयपुर और जल उपचार संयंत्र केकड़ी, अजमेर के जल उपचार संयंत्र में बीसलपुर बांध के कच्चे पानी के जमाव हेतु उच्च / मध्यम क्षारकता वाले पॉली एल्युमिनियम क्लोराइड की खुराक का निर्धारण - लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) राजस्थान

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संशोधित किया गया : 16-01-2026