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फायटोरीड अपशिष्ट जलउपचार प्रौद्योगिकी

 

फायटोरीड अपशिष्ट जलउपचार प्रौद्योगिकी

 

  • सीएसआईआर-नीरी के इस तकनीकमेंविशेष रूप से निर्मित आर्द्रभूमि शामिलहै जो कि शहरी नगर निगम, कृषि और औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए बनाइ गई है।
  • सामान्य रूप से प्राकृतिक झीलों में पाए जाने वाले पौधे जैसे हाथी घास Elephant grass (Pennisetumpurpurem), Cattails (Typha sp.), Reeds (Phragmitessp.), Cannas pp. तथा  Yellow flag iris (Iris pseudocorus)के रूप में विशिष्ट पौधों पर यह प्रणाली आधारित है जिसमें छानने तथा उपचारकरने की क्षमताहोती है। कुछ सजावटी साथ ही फूल पौधों जैसे Golden Dhuranda, Bamboo, Nerium, Colosia आदि के रूप में फूल पौधों की प्रजातियों को भी उपचार के साथ ही भूनिर्माण उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकताहै।
  • भूमि की उपलब्धता औरउपचारीत होने वाले अपशिष्ट जल की मात्राके आधार पर फायटोरीड प्रौद्योगिकीका निर्माण श्रृंखलातथा समानांतर रूप से किया जा सकता है।
  • फायटोरीड प्रौद्योगिकी के उपचार पद्धति में अधस्त्ल पर अपशिष्ट जल का प्रवाह छोटे प्रकोष्‍ट/प्रणाली में प्रवाहीत किया जाता है जिसमें ईंटोंके टुकडे, बजरी और पत्थर भरे हुए होते हैं। इन चीजों परएक बोर्ड के माध्यम से प्रवाह की गति को बरकरार रखा जाता है जिससे की प्रवाह सतह के उपर न हो
  • प्रणाली में निम्नलिखित तीन क्षेत्र होते हैं: (i) ईंटों के छोटे टुकडों और विभिन्न आकारों के पत्थरों वाला इनलेट क्षेत्र, (ii) उपचार क्षेत्र जिसमें पौधों की प्रजातियों के साथ साथ पहले के क्षेत्र का मिडीया भी इस क्षेत्र में रहता है। (iii)आउटलेट क्षेत्र
  • उपचारित जल में कुल निलंबित ठोस (टीएसएस)का विघटन 70% से 80 %, बीओडी 78% से 84%, नाइट्रोजन के लिए 70% से 75%, फास्फोरस को 52% से 64%और फीसल कॉलिफोर्म 90% से 97% तक होता है।
  • उपचारीत प्रवाह नगर निगम के उद्यान, फव्वारे और सिंचाई के लिए उपयोगी है।
  • इस प्रणाली में 20 एम3/ दिनके प्रवाह के लिए लगभग 35 वर्ग मीटर के कुल क्षेत्रफल की आवश्यकता है तथा इसके निर्माण की लगभग लागत `1.20-1.30 लाख रुपये है।
  • यह तकनीक जनरल  टेक्नो  सर्विसेज , टेचनोग्रीन  एनवायर्नमेंटल  सोलूशन्स , पुणे , BIOUMA, गोवा  तथा डी देवी  एजेंसीज , औरंगाबाद , साथ ही स्थानीय लोगोंहेतु पानी बचाने के‍ लिए लागू कर पूर्ण किया गया है।

                   

 

लाभ

  • प्रभावी लागत
  • संचालन एवं रखरखाव का खर्च नगण्य
  • न्यूनतम बिजली की आवश्यकता
  • छोटे पदचिह्न
  • पानी के पुनर्चक्रण ( रीसाइकल) तथा पुन: उपयोग की सुविधा
  • कोई बदबू तथा मच्छर का उपद्रव नहीं

प्रतिष्ठित परियोजनाओं

  • राज्यपाल भवन, मुंबई (पूर्ण हुआ)
  • नबी झील, लोनार (लोनार झील में ओवरफ्लो होते सीवेज कोरोकने के लिए)
  • तीन मूर्ति भवन, नई दिल्ली(प्रगति पर)
  • स्मृति वाटिका, नई दिल्ली (प्रगति पर )