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नीरी-झर – तत्काल वहनीय जल छलनी(फिल्टर)

 

नीरी-झर – तत्काल वहनीय जल छलनी(फिल्टर)

 

'नीरी-झर' एक उपयुक्त जल शोधन प्रणाली हैजो आपात स्थिति के तहत विशेष रूप से बाढ़ के पानी की गुणवत्ता की एक विस्तृत श्रृंखला कोपीने योग्य पानी की आपूर्ति में परिवर्तित करने की निकाय है। नीरी-झर आपात काल में पीने योग्य जल एवं खाना पकाने के लिए आवश्यक पानी की जरूरतों को पूर्ण करता है तथा बाढ़ प्रभावित स्थितियों के तहत पेयजल आपूर्ति के लिए एक आपदा प्रबंधन उपकरण के रूप में काम करता है। दो 100 लीटर के बर्तनों साथएक इकाईपीने एवं खाना पकाने के लिए प्रति व्यक्ति प्रति दिन 6-10 लीटर के आधार पर एक दिनमें10 घंटे के लिए संचालित करने पर20-30 व्यक्तियोंके लिए सेवा दे सकता है।

 

            

नीरी-झर –वहनीय तत्काल जल छलनी(फिल्टर)

 

एक प्रारूपिक इकाई में दो प्लास्टिक के पात्र (कंटेनर) शामिल हैं जिसमें से एक गुरुत्वाकर्षण द्वारा प्रवाह के प्रबंधन हेतुउँचाई पर स्थित होता है। शीर्ष पर रखेकंटेनर में दूषितपानी होता है। दिया गया ऑक्सीकरण रासायनिक घोल दूषितपानी के कंटेनर में डाला जाता है। गुरुत्वाकर्षण के कारण यह पानी उसी कंटेनर में रखे दृढ़ तथा रेत से फिल्टर होकर दूसरे कंटेनर में गिरता है। छना हुआ पानी नल के द्वारातीसरे कंटेनर में एकत्रित किया जाता है।दिया गया कीटाणुनाशक घोल तीसरे कंटेनर में डाला जाता है जिससे कंटेनर में पानी जमना शुरू होता है। कंटेनर को पूर्ण क्षमता तक भरा जाता है। आधे घंटे के बाद सुरक्षित एवं पीने योग्य पानी उपयोग के लिए तैयार है। फिल्टर की आवधिक सफाई आवश्यक है। इकाई की विशिष्ट क्षमता 20-30 लीटर प्रति घंटा है।

 

विशेषताएँ

  • दूषित पानी जिसमें मलिनता का स्तर 100-300 एनटीयू होता है उसेनीरी-झरकम से कम 3 एनटीयू तक नीचे लाता है।
  • निर्माण करने के लिए सरल
  • परिचालन में आसान
  • न्यूनतम रखरखाव
  • वज़न में हल्का
  • परिवहन और स्थापना में सरलता
  • आपातकालीन पानी की आपूर्ति के लिए सबसे विश्वसनीय
  • गुरुत्वाकर्षण द्वारा संचालित
  • बिजली की आवश्यकता नहीं
  • विशिष्ट क्षमता - 20लीटर / प्रति घंटा

 

            

नीरी द्वारा अक्तूबर2006 में बाड़मेर जिले के बाढ़ प्रभावित दूरदराज क्षेत्रों में 100यूनिट स्थापित किए जिससे गंदे एवं दूषित वर्षा जल को पीने योग्य पानी में परिवर्तित किया गया।

 

           

नीरी द्वारा सन 2009में सुंदरबन जिले (पश्चिम बंगाल) के आइला चक्रवात प्रभावित गांवों में तालाब के पानी के उपचार हेतु 400यूनिट स्थापित किए गए।