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द्वि स्तरीय जैवऑक्सीकरण (टीएसबी) प्रक्रिया

द्वि स्तरीय जैवऑक्सीकरण (टीएसबी) प्रक्रिया

 

द्वि स्तरीय जैवऑक्सीकरण (टीएसबी) प्रक्रिया, एक जैविक अपशिष्ट उपचार प्रक्रिया है जिसे नागार्जुनएग्रीकेम लिमिटेड, श्रीकाकुलम (एपी) द्वारा विकसित कर औद्योगिक साइट पर उत्पन्न किसी भी मात्रा में अपशिष्ट प्रवाह केउपचार हेतु लागू किया गया है। नई अपशिष्ट जल उपचार सुविधा स्थापित करने या मौजूदा अपशिष्ट जल उपचार सुविधा में सुधार करके टीएसबी प्रक्रिया लागू कि जा सकती है।

 

टीएसबी प्रक्रिया तकनीकी जानकारी

  • टीएसपी में दो अनुक्रमिक चरणों में बैचरिएक्टर प्रणाली सम्मिलित हैं।
  • प्रत्येक चरण चक्रीय उत्प्रेरित कीचड़ प्रक्रिया के रूप में कार्य करता है जिसमें प्रत्येक चरण में भरने, वेंटिलेशन, स्थायीकरण एवं निस्तारण के चरण सम्मिलित होते हैं।
  • मिश्रित प्रवाह से जैविक प्रदूषण का पसूडोमोनस, बेसिलस, परकॉकस,परपोषीजीवाणु जैसे जैवऑक्सीकरण के साथ ही वाष्पशीलकार्बनिक यौगिकों (VOCs) एवं फिनोल को भी हटाने का कार्य प्रथम चरण में होता है।
  • दुसरे चरण में कार्बनिक अपशिष्ट के जैवऑक्सीकरण के साथ-साथ स्वपोषीनायट्रोजनरोपीत करने वाले बैक्टीरिया (नायट्रोसोमोनस, नितरोबैक्टेर, नीट्रोसोकॉकस, नीट्रोविब्रिओ, नीट्रोस्पिराएसपी आदि) प्रवाह में उपस्थितअमोनिया को ऑक्सीकृत करते हैं।
  • टीएसबी'परपोषी-स्वपोषी की अलग-अलग प्रतिक्रियाओं ' के माध्यम से उच्च सीओडी और अमोनिया अपशिष्ट का उपचार / प्रबंध करता है।
  • उपचारीत प्रवाह पुन: उपयोग हेतु रिवर्सऑस्मोसिसफ़ीड मानकों को पूरा करता है (सीओडी<100 मिलीग्राम/एल, बीओडी<30 मिलीग्राम/एल और एनएच3-एन <5 मिलीग्राम/एल)

 

मुख्य विशेषताएं

  • कोई रासायनिक उपचार सम्मिलित नहीं
  • जैवऑक्सीकरण प्रक्रिया के माध्यम से ऑर्गेनिक्स एवं अमोनिया  के साथ फिनोल और साइनाइड को भी निष्कासित (रिमूवल) किया जा सकता है।
  • ऑर्गेनिक्स की उपस्थिति में नाइट्रीकरण का अवरोधन समाप्त हो रहा है।
  • दो चरणों की पृथक्करण प्रक्रिया विशिष्ट जीवाणुस्ट्रेनके विकास के माध्यम से प्रत्येक चरण में विशिष्ट प्रदूषण को हटाने को लक्षित करती है ।

 

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